धर्म गुरुओं के गेम vs ब्लू व्हेल गेम !

अगर आप जानना चाहतें है की कुछ लोग कैसे अपनी पूरी ज़िंदगी बाबाओं को अर्पित कर देते है तो यह रिपोर्ट आपके लिए ही है

दोस्तों आपने ब्लू व्हेल गेम का नाम सुना ही होगा जिसमें मानसिक रुप से कमजोर लड़को को टॉर्चर किया जाता है उनकी पर्सनल डिटेल को लिक करने की धमकी दी जाती है और उन्हें कई तरह के खतरनाक टास्क खेलने पर मजबूर किया जाता है और अंतिम टास्क में उसकी मौत हो जाती है ……..पर इससे भी भयंकर गेम माइंड आज के धर्म गुरुओं ने खेला है ।

जी हां दोस्तों यह गुरुओं की एक व्रहत्तर आत्मा है और जो छोटी आत्माओं को कमजोर आत्माओं को अपने जाल में फंसाती है उनका ब्रेनवाश करती है , उनको आर्थिक वह मानसिक रुप से चौपट करती है तथा अपने काम में लगाती है , अपने प्रचार में लगाती है , उनकी पूरी जिंदगी उनके विज्ञापन के रूप में सीमित हो जाती है

शुरुआत :-

बाबाओं के इस माइंड गेम की शुरुआत व्यक्ति के जीवन में कनफ्लिक्ट से शुरू हो जाती है , जिसमें आदमी आम जीवन से भागता हुआ है , समस्या और प्रॉब्लम से पलायन करता है उसके जीवन में अकेलापन होता है और कुछ महान बनने की इच्छा होती है कुछ दिव्य जीवन जीने की चाह होती है,

उसे दिखता है यहाँ तो सब एक दूसरे का सम्मान करते है । सब सेवा भाव रखते है । पर कभी देखिए जो सेवादार होते है जो श्रमदान देते है वह सब SC/ST / OBC और आर्थिक रूप से कमज़ोर लोग ही क्यों होते है । 90% से ज़्यादा लोग ऐसे ही होते है ।

क़िस्से कहानियों का ऐसा दौर चलता है की सब उनकी बातों में आ जाते है । उन्हें आत्म शान्ति मिलती है । वैसी ही बातें की जाती है जैसी उन्हें सुननी रहती है ।

अपना काम धंधा सब छोड़कर अधिकतर समय उनके पीछे लग जाते है ।

1 step :-

पहले स्टेप में आमतौर पर बाबा अपनी किताबें पकड़ आता है ,जो बहुत ही आकर्षक लुभावनी मजेदार और महान बुद्ध बनाने , समाधि , कुंडलिनी जागरण , जैसी 50 तरह के अनुभव से भरी होती है

फिर वह एक किताब से दूसरी किताब की ओर बढ़ता है , हर किताब में किसी दूसरी तीसरी किताब का विज्ञापन और लींक होता है , इस तरह से वह 30-40 किताब पढ़ लेता है और उसके दिमाग में एक अलग ही तरह की दुनिया निर्मित हो जाती है और उन किताबों के साथ ही वह बाबा के सम्मोहन जाल में , मकड़जाल में पूरी तरह फस जाता है और उसके ब्रेन पर बाबा का कब्जा हो जाता है।लाखों करोड़ों की किताबें बेच देते है सत्संग आयोजनो में ।

2 step :-जैसे ब्लू व्हेल गेम में कई तरह के टास्क होते हैं ऐसे ही बाबा के माइंड गेम में भी उसे , अपने हाथ पर , किताबों पर , अपने सिर के बालों पर , एक दूसरे के पैर छूना ,अपने छल्ले पर , अपने घर के दरवाजे पर , अपनी बाइक या कार पर ” गुरु का नाम या फ़ोटो ) लिखना होता है । और यह सब बाबा की आत्मा उससे करवाती है ।

3 step :- इस स्टेप मे बाबा आम लोगों से अपने आदमी को लड़ाता है , परिवार में कलह करवाता है , समाज से कटवाता है , उसके चारों तरफ ऐसे विचारों का जहर जाल फैलाता है या दीवार बनाता है जिससे वह आम जीवन से कट जाता है ।

4step :- फिर यह आम जीवन से कटा हुआ आदमी अपने जैसे ही किसी दूसरे गुलाम से कोंटेक्ट में रहना चाहता है इसलिए अपनी Facebook id में अपनी प्रोफाइल पिक हटा कर अपने बाबा की फोटो लगाता है अपने WhatsApp के वॉलपेपर से लगाकर प्रोफाइल पिक पर लगाता है ।

5 step :- इस स्टेट में सम्मोहित आदमी बाबा के ध्यान शिविर को जॉइन करता है अब तक जो भी बाबा की किताबों में ध्यान विधियों को पढा था उन्हें प्रैक्टिकल करता है और बचा खुचा माइंड भी चौपट करता है ।

6 step :- अब यह इंसान अधिक से अधिक शिविरों को अटेंड करता है सत्संग लोगों में गुल मिलता है । बाबा की ध्यान वीडियो को रोज करता है । आत्म- सम्मोहित होता है । उसके ऑडियो-वीडियो पूरी तरह सुनता है , उनके कारनामों को याद रखता है , उसके इतिहास में रस लेता है ,और बाबा को सबसे महान बुध्द मानता है ।

7 step :- अब यह आदमी खुद शिविरों का संचालन करवाता है या फिर उसकी व्यवस्था करता है अधिक से अधिक लोगों को उसमें जोड़ता है । WhatsApp Facebook पर प्रचार करता है , उसके आश्रम बनाता है उसकी लाइब्रेरी बनाता है ।

8 step :- अब यह आदमी अपना पूरा जीवन अपने का विज्ञापन बंन कर गुजारा करता है , यहां तक कि खुद को उस पर छोड़ देता है और वह जो करवाए वह करता रहता है ।मतलब बाबाके प्रचार के अलावा कोई काम नहीं करता है

अब बाबा जी उस के माध्यम से काम करता है । वह बाबा का रोबोट बन जाता है क्योंकि अब उसकी कोई आत्मा नहीं होती ।

***क्या इस गेम को बंद किया जा सकता है ??

आप दोस्तों छोड़ रहे सोच रहे होंगे कि लोग इस गेम को बीच में क्यों नहीं छोड़ देते और अपनी पूरी जिंदगी गुलामी में क्यों बिताते हैं , तो दोस्तों यह मुमकिन नहीं हो पाता है क्योंकि

वह परिवार से समाज से रिश्ते-नातों से , दोस्तों से , पूरी तरह कट जाता है । और वापिस उनसे मिलने और शामिल होने का कोई रास्ता नहीं बचता । वह इतना आगे निकल चुका होता है इतना कुछ तबाह कर चुका होता है कि अब वह फिर से आम जीवन में शामिल नहीं हो सकता ।

 

उसे भय लगता है कि बिना सत्संग के वह जिएगा कैसे ??अपने गुरु को छोड़ देगा तो उसे मोक्ष कैसे मिलेगा और जो इतने सालों से मेहनत की है बुद्धत्व के लिए जो भी मानसीक यात्राए की है उन मानसिक यात्राओं को बिच में कैसे छोड़ देगा ??

और जब इन सब चीज़ों के समर्थन में समाज के पढ़े लिखे या समाज के अगुआ भी समर्थन करते है तो उसे लगता है वह सही है।

***इस गेम से बाहर कैसे निकले ??

बिना पलायन किए वास्तविक जीवन का सामना करना , सजगता में जीना , फिर से दोस्तो और रिश्तो और लोगों को फेस करना ,खुद को समझना पड़ता है ।

बिना सेल्फ नॉलेज , सजगता के , सम्यक ध्यान के , सूक्शम लोभ-लालच को समजे बिना , इस गेम से बाहर निकलना संभव नहीं है ।

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