माकपा (माले )का सोनभद्र जनसंहार पर जांच रिपोर्ट

खास बातें-हत्याकांड पूर्व नियोजित और प्रशासन भूमाफिया के साथ खड़ा था
* घटना के दौरान जिला पुलिस और प्रशासन के किसी भी अधिकारी ने नहीं उठाया पीड़ित पक्ष का फोन
* नृशंसता इतनी कि गोली खाकर गिरनेवाले आदिवासियों को ग्राम प्रधान के गुर्गों ने लाठी-डंडों से मार-मार कर हत्या की
* पीड़ित आदिवासी परिवार चार पीढ़ियों से जमीन पर काबिज थे
* बाड़ ही जब खाने लगी खेत : सुरक्षा का जिम्मा निभाने वाले पूर्व डीएम ने घटना से जुड़ी जमीन समेत 600 बीघा भूमि को पहले अपनी पत्नी-बहु-बेटी के नाम करा लिया, फिर बेंच दी थीलखनऊ, 20 जुलाई। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) ने कहा है कि सोनभद्र का आदिवासी जनसंहार पूर्व नियोजित था और प्रशासन भूमाफिया के साथ खड़ा था। घटना के दौरान जिला पुलिस और प्रशासन के किसी भी अधिकारी ने पीड़ित पक्ष का फोन नहीं उठाया।पार्टी के राज्य सचिव सुधाकर यादव के नेतृत्व में गुरुवार को उभ्भा गांव (घटनास्थल) पंहुची माले की आठ सदस्यीय टीम ने दो दिनों की पड़ताल के बाद शनिवार को अपनी जांच रिपोर्ट जारी की।पार्टी ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि पूरा मामला प्रशासन की जानकारी में था, लेकिन न तो घटना से पहले न ही उसके दौरान कोई उपाय किये गये और एक तरह से हमलावरों को खुली छूट दे दी गई।कहा कि योगी सरकार में भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई की आड़ में आदिवासियों की बेदखली की जा रही है और उनकी पुश्तैनी जमीनें हड़पी जा रही हैं। बताया कि जांच दल ने घटनास्थल का दौरा करने के दौरान मृतकों व घायलों के परिवार वालों से मिलकर संवेदना व्यक्त करने के साथ घटना की पूरी जानकारी हासिल की।जांच रिपोर्ट के अनुसार, घायल महेंद्र (पुत्र गुलाब) की माता संतीपा देवी ने दल को बताया कि जिस जमीन को लेकर घटना हुई है, उस जमीन पर हम लोग चार पीढ़ियों से बसे हैं। पहले वहां पुराना जंगल था तब से हम लोग लगातार खेती करते आ रहे हैं।घायल राजिंदर (पुत्र रामसिंह) की माता भगवंती देवी ने बताया कि घटना के दिन हम लोगों को कुछ भी नहीं पता था। अचानक मालूम हुआ कि जमीन कब्जाने के लिए ग्राम प्रधान यज्ञदत्त लगभग 32 टैक्टरों, सौ से अधिक लोगों और बंदूक, राइफल व धारदार हथियारों के साथ पहुंचकर खेत जोतना शुरू कर दिया है। जब गांव के लोग इकहट्ठा होने लगे तो उन लोगों ने गोलियां बरसानी शुरू कर दी। गोली से घायल होकर जो लोग गिरते थे, उन्हें वह लोग लाठी डंडों से पीट-पीट कर मार डालते थे।मृतक जवाहर के पुत्र राजपति ने बताया कि छह सौ बीघा जमीन पुराने कोआपरेटिव के नाम पर है। उक्त जमीन में पूर्व जिलाधिकारी प्रभात मिश्र ने सौ-सौ बीघा अपनी पत्नी, बहू, पुत्री के नाम करा लिया था और बाद में 2017 में गांव प्रधान को बेंच दिया, जिस पर कोर्ट में मुकदमा चल रहा है।मृतक बसमतिया की बहू अनीता व मृतक रामचंद्र के पुत्र पिंटू ने बताया कि पूरी घटना पर प्रशासन की तरफ से पीड़ितों के लिए कुछ भी नहीं किया गया है। न तो मुआवजा मिला है, न ही जमीन का निस्तारण किया गया है। जिला प्रशासन पूरी तरह से भू-माफिया के साथ खड़ा है।मृतक अशोक के पुत्र राजू ने बताया कि जिस समय गोली चल रही थी, उस समय हम लोगों ने कोतवाली, सीओ, डीएम, एसपी को फोन किया, किन्तु किसी ने भी फोन रिसीव नहीं किया। जब तक अपराधी हमला करते रहे तब तक पुलिस नहीं पहुंची। जब सब चले गए तब पुलिस पहुंची।पूरे घटनाक्रम पर गौर करते हुए, जांच रिपोर्ट में सोनभद्र के डीएम, एसपी को फौरन निलंबित करने, मृतकों के परिजनों को घोषित मुआवजा राशि 5 लाख से बढ़ाकर 25 लाख करने, उक्त जमीन पीड़ित आदिवासी परिवारों के नाम करने, आदिवासियों-वनवासियों की बेदखली तत्काल प्रभाव से रोकने और जनसंहार रचाने वालों को सख्त सजा देने की मांग की गई है।इन मांगों पर जोर देने, घटना का प्रतिवाद करने और योगी सरकार से जवाब मांगने के लिए पार्टी 22 जुलाई सोमवार को सोनभद्र समेत राज्य भर में जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन करेगी।माले के जांच दल में राज्य सचिव के अलावा पार्टी की राज्य स्थायी (स्टैंडिंग) समिति के सदस्य शशिकांत कुशवाहा, सोनभद्र जिला सचिव शंकर कोल, ऐपवा नेता जीरा भारती, राज्य समिति सदस्य बिगन गोंड़ व घोरावल क्षेत्र के पार्टी नेता विजय कोल प्रमुख रूप से शामिल थे।
##

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s