क्या फ़ेसबुक भारत के बहुजनों के लिए नुक़सान दायक साबित हो रहा है ? क्या फ़ेसबुक का बहिष्कार करने का समय आ गया है ? शायद नहीं अभी नहीं !!

मुंबई: हाल ही में फ़ेसबूक पर आरोप लगे है की फ़ेसबूक भारत में रूलिंग पार्टी को फ़ेवर कर रहा है । वाल स्ट्रीट जेनरल ने सीधे सीधे अपनी न्यूज़ में लिखा की भारत की फ़ेसबूक पब्लिक पॉलिसी मेकर आँखी दास ने रूलिंग पार्टी के नेताओं के फ़ेसबूक की पॉलिसी के बावजूद उनकी हेट स्पीच को नहीं हटाया और उनकी पोस्ट की रीच को बढ़ाने में मदद की । वॉल स्ट्रीट जेनरल ने कहा की आँखी दास ने रूलिंग पार्टी के नेताओं के अकाउंट और पोस्ट को बैन करने की बजाय उन्हें बढ़ावा दिया। फ़ेसबूक की ग्लोबल पॉलिसी के अनुसार जिन पोस्टों को बैन करना चाहिए जिन नेताओं के अकाउंट बंद करने चाहिए उन्हें सपोर्ट किया गया । रूलिंग पार्टी के लोगों को अलग तरीक़े से हंडल किया जा रहा है और बाक़ी लोगों के अकाउंट को अलग तरीक़े से ।

सरकार और रूलिंग पार्टी के विरोध में लिखने वालों की पोस्ट की पहुँच कम की जा रही है , अकाउंट डिलीट किए जा रहे है जो फ़ेसबूक के नियमों के ख़िलाफ़ है पर भारत में किया जा रहा है ।

भारतीय फ़ेसबूक अधिकारी मनमाने तरीक़े से काम कर रहे है ।

और इसमें मार्क जूकरबॉर्ग की भी मौन सहमति है ।

हो भी क्यों ना ? भारत फ़ेसबूक का सबसे बड़ा कस्टमर है । तक़रीबन 30 करोड़ यूज़र के साथ भारत फ़ेसबूक का दुनिया का सबसे बड़ा कस्टमर है । दूसरे नम्बर पर अमेरिका है 20 करोड़ यूज़र के साथ । बाक़ी सारी दुनिया तो बहुत पीछे है .

इसलिए मार्क को अपने सबसे बड़े कस्टमर

के आगे थोड़ा सॉफ़्ट दिखाई दे रहा है और पॉलिसी के विरुद्ध जा कर सरकार के सपोर्ट में काम कर रहें है ।

हाल ही में फ़ेसबूक ने 5.6 बिलियन डोलर का इन्वेस्टमेंट JIO टेलिकॉम में किया है । आप अंदाज़ा लगा सकते है इतना बड़ा इन्वेस्टमेंट वह भी JIO में ? फिर सरकार के समर्थन में तो फ़ेसबूक को रहना ही पड़ेगा ।

यही नहीं मोदी जी 45 मिलियन फ़ॉलोअर के साथ दुनिया में फ़ेसबूक फ़ॉलोअर की लिस्ट में पहले नम्बर है ।दूसरे नम्बर पर डॉनल्ड ट्रम्प बहुत पीछे है 28 मिलियन फ़ॉलोअर फ़ॉलोअर के साथ ।

इसके अलावा किसी भी राजनीति पार्टी के फ़ेसबुक अकाउंट के नम्बर में भी भारत की रूलिंग पार्टी पूरी दुनिया में नम्बर एक पर है । फ़ेसबुक पर रूलिंग पार्टी के 16 मिलियन अधिकृत अकाउंट है जबकि USA की सबसे बड़ी पार्टी के सिर्फ़ 2 मिलियन अकाउंट है ।

सोचिए सिर्फ़ भारत में भाजपा के सिर्फ़ घोषित राजनीतिक अकाउंट इतने है तो अघोषित अकाउंट कितने होंगे ? वैसे भी रूलींग पार्टी की आईटी सेल तो जगज़ाहिर है । सोचिए जब इतने सारे अकाउंट फ़ेसबुक पर होंगे तो वह लोगों के ऊपर कितना प्रभाव डालेंगे ?

यह सारे लोग मिल कर ग़लत को सही और सही को ग़लत साबित करने की छमता रखते है । और उसके ऊपर से फ़ेसबुक का इन्हें सपोर्ट । इन लोगों की पोस्ट, लेख विडीओ हज़ारों लाखों लोगों तक पहुँचते है ।बाक़ी आम लोगों की पोस्टों की पहुँच कम की जाती है ।

भारत इतना बड़ा कस्टमर है फ़ेसबूक के किए इसलिए वह भारत सरकार के विरोध में नहीं जाएगा ।

फिर हम क्या करें ? क्या फ़ेसबूक का विरोध किया जाय ? बहिष्कार किया जाय? जैसे कि चाइना ने किया है ? जी चीन ने फ़ेसबूक को देश में ब्लॉक कर रखा है । इसका मतलब यह नहीं की वहाँ सोशल मीडिया उपयोग नहीं करते । करते है चीन भी सोशल मीडिया ऊपयोग करता है पर वह अपना खुद का बनाया ऐप उपयोग करते है । क्या हम भारत के लोगों को भी ऐसा करना चाहिए ।

मेरा विचार है कि नहीं ऐसा किया जाना चाहिए । क्योंकि अगर भारत में ऐसा किया जाएगा तो नया एप या तो सवर्ण बनाएँगे या फिर रूलिंग पार्टी के लोग । दोनो ही सूरत में भारत के बहूजनो का बहुत नुक़सान होगा ।

हम इस बात से इंकार कर नहीं कर सकते की फ़ेसबूक और वहतसप्प भारत के बहुजनों के लिए वरदान साबित हुआ है ।और इसलिए बहुत से लोग चाहतें है की यह भारत में बैन कर दिया जाय । क्योंकि इनके बैन होने से सबसे ज़्यादा नुक़सान बहूजनो का ही होगा ।

हाँ इससे कुछ नुक़सान हो रहा है पर इसे फ़ायदे में बदला जा सकता है अगर बहुजन इसका सही से उपयोग करे । मार्क जूकर बार्ग का क्या है उन्हें तो कस्टमर और बिज़नेस चाहिए । और कस्टमर हम है । हम बहुजन ही असल से सबसे बड़े कस्टमर है फ़ेसबुक के ।

यह दुनिया का नियम है यहाँ फ़्री में कुछ नहीं मिलता । पर हम फ़ेसबुक और वहतसप्प फ़्री में उपयोग करते है । और जब फ़्री में कोई किसी उत्पाद का उपयोग करता है तो असल में वह उसका उपयोग नहीं करता बल्कि यूज़र खुद ही एक उत्पाद बन जाता है ।

फ़ेसबूक के लिए सबसे महत्वपूर्ण है उपयोग करता ।और सबसे बड़े उपयोग करता हम है हम बहुजन ।

इसलिए हमें फ़ेसबुक का बहिष्कार करने की बजाय इसका सही उपयोग करना चाहिए ।ग़लत पोस्टों का विरोध करे । अच्छी पोस्ट और जानकारी को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचाएँ । इसे सिर्फ़ मनोरंजन का साधन ना समझे । सारे बहुजन मिलकर बड़ी ताक़त बन सकते है और फ़ेसबूक को बहुजनों की बेहतरी के लिए उपयोग कर सकते है ।

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