भारत की GDP -23.9% पहुँच गई है । आसान शब्दों में समझिए इसके पीछे का गणित और अर्थशास्त्र !!

मुंबई: देश की GDP माइनस 24 % हो गई है । यह एक बड़ी समस्या है । हालांकि, इसकी संभावना थी और अंदाज़ा यही था की यह माइनस 20% के आसपास रहेगी । पर जो आँकड़े जारी किए गए है वह भारत के लिए चिंता जनक है । पहली तिमाही में में जीडीपी -24% प्रतिशत है।
दूसरे शब्दों में, इस साल अप्रैल, मई और जून में भारत में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य पिछले साल के तीन महीनों में भारत में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य से 24% कम है। जैसा कि चार्ट 2 में बताया गया है, अर्थव्यवस्था में विकास के लगभग सभी प्रमुख क्षेत्र चाहे वह सीमेंट का उत्पादन हो या स्टील की खपत – बहुत गिरावट दिख रही है । इस तिमाही में भी कुल टेलीफोन उपभोक्ताओं में भी गिरावटदेखी गई। इससे भी बदतर यह है कि व्यापक लॉकडाउन के कारण, डेटा स्पीड में बहुत कमी आइ है और यह समस्या आगे और गम्भीर होगी ।

GDP का इतना गिरना क्या संकेत देते है ?

यह अब कन्फ़र्म है की अब पूरे वर्ष की जीडीपी भी खराब हो सकती है। एक अनुमान के मुताबिक़ पूरे वित्तीय वर्ष के लिए GDP माइनस 7% रहेगा ।

चार्ट 1 में आप देख सकते है की 1990 के दशक की शुरुआत में आर्थिक उदारीकरण के बाद से, भारतीय अर्थव्यवस्था ने हर साल औसतन प्लस 7% जीडीपी वृद्धि देखी है। इस साल, यह पहली बार माइनस 7% तक पहुँचने की संभावना है ।

अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को देखे तो कृषि को छोड़कर, जहां 3.4% की वृद्धि हुई, अर्थव्यवस्था के अन्य सभी क्षेत्रों में आय में गिरावट देखी गई। सबसे ज्यादा प्रभावित निर्माण (-50%), व्यापार, होटल और अन्य सेवाएं (-47%), प्रोडकशन (-39%), और खनन (-23%) है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये ऐसे क्षेत्र हैं जो देश में अधिकतम नई नौकरियों का पैदा करते हैं। ऐसे समय में जहां इन क्षेत्रों में इतनी तेजी से उनका उत्पादन और आय गिर रही है – यह अधिक से अधिक लोगों को या तो नौकरियों से बाहर कर देगा और नए रोज़गार मिलना दूभर हो जाएगा ।
GDP की यह समस्या क्यों उत्पन्न हुई ? और सरकार इसे क्यों सम्भाल नहीं पाई ?किसी भी अर्थव्यवस्था में, माल और सेवाओं की कुल मांग – जो कि जीडीपी है – विकास के चार पहियों में से होती है।
सबसे बड़ा पहिया आपके – हमारे जैसे निजी व्यक्तियों की मांग की खपत है। आइए इसे हम C मान लेते है । भारतीय अर्थव्यवस्था में, इस तिमाही से पहले C का सकल घरेलू उत्पाद का 56.4% था।
दूसरा सबसे बड़ा पहिया निजी क्षेत्र के व्वयसायहै। आइए इसे हम I मान लेते है और यह भारत के सभी सकल घरेलू उत्पाद का 32% हिस्सा है।
तीसरा पहिया सरकार द्वारा उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं की मांग है। आइए इसे G कहते हैं, और यह भारत के GDP का 11% है।
भारत के निर्यात से आयात घटाने के बाद अंतिम पहिया जीडीपी पर शुद्ध मांग है। चलो इसे NX कहते हैं। भारत के मामले में, यह सबसे छोटा पहिया है और चूंकि भारत आम तौर पर इसके निर्यात से अधिक आयात करता है, इसलिए इसका प्रभाव जीडीपी पर नकारात्मक है।
तो कुल जीडीपी = C + I + G + NX
अब चार्ट 4 को देखें। यह दिखाता है कि पहली तिमाही में में प्रत्येक पहिए के साथ क्या हुआ है।


निजी खपत – भारतीय अर्थव्यवस्था को चलाने वाला सबसे बड़ा पहिया – 27% तक गिर गया है।

दूसरा सबसे बड़ा पहिया – निजी व्यवसायों द्वारा निवेश – और भी कठिन हो गया है – यह पिछले साल की इसी तिमाही का आधा है। इसलिए दो सबसे बड़े पहिए , जो कि कुल जीडीपी के 88% से अधिक के लिए जिम्मेदार थे पहली तिमाही में बड़े पैमाने पर गिरावट देखी है ।

NX या शुद्ध निर्यात मांग इस Q1 में सकारात्मक हो गई है क्योंकि भारत का आयात इसके निर्यात से अधिक हो गया है।

विकास का अंतिम पहिया – सरकार। जैसा कि डेटा दिखाता है, सरकार का खर्च 16% बढ़ गया था, लेकिन अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों (पहियों) में मांग (शक्ति) के नुकसान की भरपाई के लिए यह कहीं नहीं था। दूसरे शब्दों में, सरकार का खर्च बढ़ गया लेकिन यह इतना कम है कि यह लोगों और व्यवसायों द्वारा की जा रही मांग में कुल गिरावट का सिर्फ 6% ही कवर कर सका।

परिणाम यह है कि कागज पर, जीडीपी में सरकारी व्यय का हिस्सा 11% से 18% हो गया है, फिर भी वास्तविकता यह है कि कुल जीडीपी में 24% की गिरावट आई है।

अब सरकार के पास रास्ता क्या है?

जब आय में तेजी से गिरावट आती है, तो निजी व्यक्ति खर्च में कटौती करते हैं। जब निजी खपत तेजी से गिरती है, तो निजी व्यवसाय निवेश करना बंद कर देते हैं। चूंकि ये दोनों स्वैच्छिक निर्णय हैं, इसलिए लोगों को वर्तमान परिदृश्य में अधिक निजी निवेश करने के लिए और आम लोगों को अधिक खर्च करने के लिए मजबूर करने का कोई तरीका नहीं है।

यही तर्क निर्यात और आयात के लिए भी है।

इन परिस्थितियों में, केवल एक पहिया है जो जीडीपी को बढ़ावा दे सकता है और वह है सरकार (G)। सरकार जब अधिक खर्च करती है – तो सड़कों और पुलों का निर्माण करके और वेतन का भुगतान करके या सीधे पैसा सौंपकर – अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित कर सकती है। यदि सरकार पर्याप्त रूप से पर्याप्त खर्च नहीं करती है तो अर्थव्यवस्था को ठीक होने में लंबा समय लगेगा।

सरकार ज़्यादा खर्च क्यों नहीं कर पा रही है ?

कोविड संकट से पहले ही, सरकार अपनी कमाई से ज़्यादा खर्च कर रही है । सरकार ने अपनी जमा पूँजी ख़त्म कर दी है ।हालत यह है की पैसे उधार लेने पड़ रहे है । RBI की जमा पूँजी भी निकाल ली गई है । परिणामस्वरूप, आज सरकार के पास पैसा नहीं है।

पहले नोटबंदी , GST और अब रही सही कसर कोरोना की वजह से सरकार का ख़ज़ाना ख़ाली है । और इससे उबरने की जल्दी संभावना नहीं है ।

आपको क्या करना चाहिए ऐसे समय में ?

यह समय बहुत संभल कर चलने का है । कोशिश कीजिए कि नए खर्च ना बढ़े । मौजूदा खर्च को कम करने की कोशिश करे । अगर नौकरी पर है तो किसी भी सूरत में फ़िलहाल बदलने या छोड़ने की कोशिश ना करे : आने वाले समय में संकट और बढ़ सकता है इसलिए जितना ही सके बचत करे । फ़िलहाल नए निवेश से बचे कुछ समय अभी माहौल पर नज़र रखे उसके बाद निर्णय ले ।

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