केरल में दलित को अंतिम संस्कार से रोकना अमानवीय व असंवैधानिक कृत्य है – आइसा

यूपी आइसा एससी/एसटी व मानवाधिकार से स्वतः संज्ञान ले कार्रवाई की अपील करेगा .

कश्मीर से 370 हटाने व वेलूर जैसी घटनाएं ही पत्थरबाजी व नक्सलबाड़ी आंदोलन कराती हैं – शैलेश पासवान

23 अगस्त 2019, प्रयागराज । केरल के वेल्लूर में दलित के शव को सवर्णों द्वारा अंतिम संस्कार से रोकने का कृत्य इंसानियत को शर्मसार करने वाला है । आइसा सवर्णों के इस मनुवादी कृत्य की घोर निंदा व भर्त्सना करता है ।
अपने को उच्च जाती के दम्भ के भ्रम में सवर्णों द्वारा यह तुच्छ व निकृष्ट कर्म एक मनुष्य के जन्म व मृत्युपरांत उसके प्राकृतिक, सांस्कृतिक, व सांस्कारिक अधिकार का हनन है । साथ ही भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त जन्म व मृत्यु के बाद उसके अपने परम्परा व धर्म के अनुसार अंत्येष्टि करने के अधिकार का भी हनन है ।

वेलूर की घटना पर बयान जारी करते हुए आइसा के प्रदेश अध्यक्ष शैलेश पासवान ने कहा कि त्रिपुरा जैसे राज्यों में आरएसएस भाजपा सत्ता में आने के बाद दक्षिण भारत को मनुस्मृति लागू करने का प्रयोगस्थल बना रही है । केरल में वेलूर की यह घटना ऐसे ही दुस्साहस का प्रयोग है जहां एक मृत दलित के शव को अंतिम संस्कार करने से न सिर्फ रोका गया बल्कि उसके परिवारीजन को शव को रस्सी से बांध लटकाकर ले जाने पर मजबूर किया गया ।
आगे उन्होंने कहा कि जहां केंद्र की संघ भाजपा सरकार एक तरफ अपने मनुवादी मनुस्मृति के एजेंडे लागू करने की मंशा से संविधान व लोकतंत्र पर हमला कर रही है वहीं दूसरी तरफ कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा कर देश में साम्प्रदायिक नफ़रत व उन्माद फैलाकर अनावश्यक युद्ध जैसा माहौल बना रही है ।

अनुच्छेद 370 और 35 ए ऐसे दौर में हटाया गया जब देश की सेवाक्षेत्रों की सभी सार्वजनिक विभाग व मंत्रालयों को निजी मुनाफे के लिए पूंजीपतियों को मोदी सरकार बेच रही है । गेल, भेल, हेल व रेल समेत आयुध फैक्ट्रीयों, मारुति व पारले जी बिस्किट कंपनियों से लाखों कर्मचारियों की नौकरी खत्म हो गयी है । भारत की अर्थव्यवस्था लगातार गिर रही है । सरकार को चाहिए था कि जातीय व साम्प्रदायिक नफ़रत फैलाने के बजाय देश की स्थित में सुधार के रास्ते अपनाए । लेकिन यह सरकार ऐसा करने के बजाए नागरिकों को ही विदेशी बताने के यत्न कर रही है । असम में एनआरसी लाने , कश्मीर में 370 हटाए जाने व सवर्णों द्वारा केरल के वेलूर में अमानवीय कृत्य ही क्रमशः पत्थरबाजी व बंगाल के नक्सलबाड़ी जैसे आंदोलन करने पर मजबूर करते हैं ।

आइसा केंद्र व केरल राज्य सरकार से मांग करता है कि घटना को अंजाम देने वाले मनुवादी तत्वों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए । साथ ही उत्तर प्रदेश आइसा राज्य कमिटी मानवाधिकार आयोग व एससी/ एसटी आयोग का ध्यान इस अमानवीय घटना के तरफ आकर्षित कराते हुए स्वतः संज्ञान लेने की अपील करेगा।

  • सोनू यादव, इकाई सचिव आइसा,इविवि

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