राहुल गांधी का ग़रीबों को 72 हज़ार देने का वायदा जुमला नहीं है । जानिए यह क्यों ज़रूरी है और कैसे यह पॉसिबल है !

कांग्रेस ने जिस न्यूनतम आय योजना (NYAY) का चुनावी वादा किया है, वह नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के पावर्टी इंडेक्स पर आधारित है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को ऐलान किया कि उनकी पार्टी की सरकार बनी, तो देश के सबसे गरीब 5 करोड़ परिवारों को हर महीने 6000 रुपये तक दिए जाएंगे।

सेन इंडेक्स के अनुसार, गरीबों के बीच बहुत गरीब, गरीब और अन्य की श्रेणियां होती हैं। कांग्रेस ने अपने अध्ययन में पाया है कि गरीब परिवारों को हर महीने कम से कम 12000 रुपये की जरूरत है, लिहाजा उसने योजना बनाई है कि निर्धनतम परिवारों के खातों में हर महीने इतनी रकम दी जाए कि वह 12000 रुपये तक पहुंच जाए।

, ‘उदाहरण के लिए, अगर किसी परिवार की कमाई 4000 रुपये महीने हो तो उसे 8000 रुपये की जरूरत होगी।’ ऐसे परिवारों की पहचान का काम आसान नहीं है। पार्टी इसके लिए एनएसएसओ और सीएसओ के आंकड़े की मदद लेगी। पहले यह स्कीम पायलट बेसिस पर चलाई जाएगी, उसके बाद इसे कई चरणों में लागू किया जाएगा।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की सदस्यता वाली एक कमिटी ने अध्ययन किया था, जिसके आधार पर यह स्कीम तैयार की गई। कमिटी ने इनकम डिस्ट्रीब्यूशन का विस्तार से अध्ययन किया। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्रियों और समाजशास्त्रियों से सलाह ली गई। चिदंबरम ने यह स्कीम लागू करने के बारे में कांग्रेस वर्किंग कमेटी को विस्तार से जानकारी दी थी।

NYAY के लिए दो स्लैब्स पर विचार किया था यानी सबसे निर्धन 10 प्रतिशत परिवार और फिर उसके बाद उनसे कुछ ज्यादा इनकम वाले 10 प्रतिशत परिवार। हालांकि पार्टी ने 20 प्रतिशत निर्धनतम परिवारों को 6000 रुपये महीने तक की बिना शर्त इनकम गारंटी पर मुहर लगाई।

कांग्रेस के डेटा एनालिटिक्स डिपार्टमेंट के हेड प्रवीण चक्रवर्ती ने कहा, ‘पिछले कई वर्षों में पाया गया है कि केवल जीडीपी ग्रोथ से इनकम नहीं बढ़ती। जितना सोचा गया था, ट्रिकल डाउन इफेक्ट उतना प्रभावी नहीं दिख रहा है। यह स्कीम नोट वापसी होगी क्योंकि हम लोगों को पैसा लौटाएंगे।’

दूसरे देशों में भी ऐसी स्कीम आजमाई जा चुकी है। ब्राजील में मिनिमम इनकम की गारंटी दी गई थी, लेकिन उसके साथ यह शर्त थी कि लोग अपने बच्चों को स्कूल जरूर भेजेंगे। 1967 में अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने पायलट प्रॉजेक्ट के जरिए इसे लागू की थी।

बड़ा प्रश्न है की इतना पैसा आएगा कहाँ से ?

अगर सालाना 5 करोड़ परिवार को 72 हज़ार रुपए दिए जाते है तो सालाना ख़र्च आएगा 3 लाख 60 हज़ार करोड़ रूपये।

यह रक़म मौजूदा बजट का 14% है ।

इस समय पहले से ही ग़रीबी के लिए जो योजनाएँ पर ख़र्च हो रहा है वह तक़रीबन टोटल बजट का 10%- 12% ही है । जो देश भर में चल रही तक़रीबन 900 से ज़्यादा स्कीम पर ख़र्च हो रहा है ।काफ़ी समय से यह चर्चा चल रही थी की इन स्कीमों के बदले इस तरह की मिनिमम इनकम गरेंटी की योजना शुरू की जाय । इससे लाभार्थी को सीधे फ़ायदा पहुँचेगा । और सरकार पर बहुत ज़्यादा बोझ भी नहीं बढ़ेगा ।

यह योजना लागू होने पर पूरे देश के विकास पर फ़र्क़ पड़ेगा । जब देश की 20% जनता के पास पैसा पहुँचेगा तो पर्चसिंग पॉवर बढ़ेगी । डिमांड बढ़ेगी । इसके लिए पैदावार बढ़ाना पड़ेगा । कल – कारख़ाने बढ़ेंगे । रोज़गार बढ़ेगा ।

ध्यान रहे कि इस स्कीम तहत सिर्फ़ पाँच करोड़ परिवारों को फ़ायदा मिलेगा जिसमें यह सुनिश्चीत किया जाएगा की परिवार की आय 12 हज़ार से कम ना हो । जितना कम होगा उतना सरकार ऐड करेगी । मानलिजिए किसी परिवार की आय पाँच हज़ार है तो सरकार सात हज़ार और देगी ताकि मिनिमम इनकम तक पहुँच सके ।

एक और बड़ी ख़ास बात है यह पैसा परिवार के किसी महिला सदस्य के खाते में ही जमा होगा ।इससे महिलाओं के सशक्तिकरण में फ़ायदा होगा ।

जबसे यह स्कीम का वायदा किया है गाँव गाँव तक इसकी चर्चा ज़ोरों पर है । हालाँकि विरोधी कई कई तरीक़े से इसे सिर्फ़ जुमला साबित करने पर तुले है ।

पर यह कोई एक दिन का नतीजा नहीं है इस पर काफ़ी रीसर्च की गई है । और अगर यह लागू होता है तो इसका फ़ायदा पूरे देश को होगा ।

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