क्या है सच आपके मोबाइल मे बिना आपकी अनुमति के आधार का हेल्प लाइन नम्बर ऐड करने का ?

मुंबई: समस्या गम्भीर तो है , पर कितनी और सच क्या है ?

यह समस्या शुरू हुई इस महीने की शुरुआत के जब UDAI ने ट्वीट किया की बहुत से लोगों के मोबाइल में आधार कार्ड का हेल्प लाइन नम्बर कांटैक्ट लिस्ट में ऐड हो गया है और वह भी बिना उनकी अनुमति के ।

हड़कम्प तो मचना ही था और जम कर मचा देश भर में । क्योंकि बहुत से लोगों के मोबाइल में सचमुच ही वह नम्बर ऐड था कांटैक्ट लिस्ट में और सब कह रहे थे की उन्होंने यह नम्बर ऐड नहि किया है । यह नम्बर था 1800-300-1947 काफ़ी लोगों के ऐंड्रॉड मोबाइल में सेव मिला । बिना उनकी अनुमति के । यह निजता के अधिकार का सारासर उल्लंघन था ।

सोशल मीडिया पर इसके होने वाले दुरुपयोग पर बहुत डरावने मैसेज शेयर होने लगे । और लोग डर कर इस नम्बर को डिलीट करने लगे । क्योंकि यह सच भी है की आपके मोबाइल को हैक करना मुश्किल नहि है ।

क्योंकि अभी हाल में देश के TRAI संस्था के अध्यक्ष ने एक हैकर को चलेंज किया था कि यह मेरा आधार कार्ड नम्बर है । अगर पावर हो तो इस आधार कार्ड के नम्बर से मुझ तक पहुँच कर मुझे कोई नुक़सान पहुँचा कर दिखाओ। देश की इतनी बड़ी संस्था का यह खुला चलेंज था किसी हैकर को । हैकर ने चलेंज ऐक्सेप्ट किया और 24 घंटे के अंदर उसने ट्वीट किया की मैंने आपके आधार नम्बर का उपयोग करके आपके अकाउंट में 1 रुपया जमा किया है ।स्क्रीन शॉट भी दिया।

हड़कम्प मचना ही था ।इतना ही नहि उसने उनके चार और बैंक अकाउंट के बारे में बताया ,किस बैंक में है यह भी बताया , उनका पासपोर्ट नम्बर , उनकी जन्मतींथी ,वह कोन कोन से मोबाइल नम्बर उपयोग करते है इसके अलावा भी कुछ पर्सनल जानकारी की बात बताई ।

यह बहुत ही ख़तरनाक है जब देश की कोमुनिकेशन संस्था के सबसे उच्च पद पर उसकी पर्सनल जानकारी और बैंक अकाउंट सुरक्षित नहि है तो आम आदमी ….?

इसलिए लोगों को और टेंशन हो गया । सरकार ने टेलिकॉम ऑपरेटर से जवाब माँगा की ऐसा किसने और क्यों किया । एयरटेल ,आयडीया सहित सभी ने इंकार किया की उन्होंने ऐसा कुछ नहि किया ।

आधार वालों ने भी कहा की हमने किसी से कोई क़रार नहि किया ।

अब जनता को डबल टेंशन सरकार ने अपने हाथ खड़े कर दिए , टेलिकॉम वालों ने कहा उन लोगों ने नहि ऐड किया और आधार वालों ने भी कहा की किसी को नहि कहा ऐसा करने के लिए ।

अब जनता परेशान की फिर किसने किया यह , जादू से हो गया क्या ? जनता ने जब उस नम्बर को काल लगाया तो नम्बर बंद था । जनता और परेशान की कोई लिंक ही नहि मिल रहा ।

फिर गूगल ने आगे आकर उस परेशानी का अंत किया ( हालाँकि अभी अंत शायद हुआ नहि है ) गूगल ने कहा की साल 2014 में उसने ही अपने नए हैंड्सेट में भारत की जनता की सुविधा के लिए यह आधार का नम्बर उस समय सभी हैंड सेट में प्री लोड कर दिया था ।बिना अनुमति के यह सोच कर की भारत की जनता को हेल्प मिलेगी।

अब हुआ यह की साल 2014 तक काफ़ी लोग अपने कॉंटेक्ट जीमेल पर सेव करने लगे थे । तो वह कांटैक्ट नम्बर ट्रान्स्फ़र होते होते यहाँ तक पहुँच गया है । जिसका ध्यान अब सबको हुआ है की उन्होंने तो ऐड किया नहि ।

गूगल ने इसके लिए माफ़ी भी माँग ली है लिखित रूप से ।

अब यह समस्या ख़त्म हो जानी चाहिए थी । पर कुछ लोगों बे प्रश्न किया की साल 2014 में तो ट्राई इस तरह का नम्बर इसशु ही नहि करती थी उसके बाद के सालों में ऐसा हुआ था । तो गूगल क्यों ख़ुद आगे आकर अपने को दोषी बता कर कटघरे में खड़ा कर रहा है ? कही कुछ और पेंच है क्या …??

फ़िलहाल पता नहि ..आज के समय में कुछ भी हो सकता है ।

आप यह कर सकते है की कोई नुक़सान अभी तक प्रूफ़ तो नहि हुआ है लेकिन आपको वह नम्बरडिलीट कर ही देना चाहिए क्योंकि उसका कोई उपयोग नहि है ।

अंग्रेज़ी अख़बारों में तो काफ़ी चर्चा हुई पर हिंदी में यह सब बातें कम ही आती है । इसलिए शेयर करे ताकि लोगों तक जानकारी पहुँचे और डरने की बजाय जागरुक बने।

जय भीम ,जय भारत

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