बुद्ध और बाबा साहेब को अपनाने से क्या होगा ?

बौद्ध धम्म अपनाने के बाद भारत के दलित बहुजनों में बहुत तेजी से बदलाव होते हैं। ये बात सैकड़ों अनुसंधानों से सिध्द हो चुकी है। महाराष्ट्र और दक्षिण भारत सहित उत्तर प्रदेश में जो रिसर्च हुई हैं उन सबमे साफ जाहिर होता है कि ऊपर ऊपर ही नहीं बल्कि बहुत बुनियाद में बदलाव हो रहे हैं।

  1. ये कि बौद्ध धम्म अपनाते ही उनकी अपनी जातीय और धार्मिक पहचान से जुड़ी हीन भावना खत्म होने लगती है। वे पहली बार खुद को एक इंसान समझते हैं।

2.ये कि उनके घरों से व्यर्थ के देवी देवता और शास्त्र बाहर निकल जाते हैं। धीरे धीरे ब्राह्मणवादी कर्मकांड जैसे मृत्युभोज, श्राध्द, दहेज इत्यादि जैसे असभ्य और खर्चीले व्यवहार बन्द होने से उनके घर मे धन बचने लगता है।

3.ये कि काल्पनिक भगवानों और उनकी कथाओं से बच्चे आजाद हो जाते हैं। वे जिंदगी को सीधे और वैज्ञानिक ढंग से देखते हैं और उनका वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होने लगता है। बच्चो में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ने लगती है।

  1. ये कि वे नए रोजगार की तलाश करते हुए शिक्षा, प्रबन्धन, कौशल और तकनीक से जुड़े कई प्रयोग करने लगते हैं, इससे उनमे नया बल और स्पष्टता जन्म लेती है।
  2. ये कि उनमे एक नई सामाजिक और राजनीतिक चेतना जन्म लेती है जो उनमे आपस में सहयोग और सोशल नेटवर्किंग को बढ़ाती है। अब इसका एक अखिल भारतीय स्वरूप भी बन चुका है। इसका वैश्विक नेटवर्क भी पहले से ही मौजूद है।

  3. ये कि भारत के बौध्द अपनी प्रेरणाओं के लिए अरब या इटली पर निर्भर नहीं होते। बूद्ध और बौद्ध धम्म विशुद्ध भारतीय है। ये हमारा धर्म है। हम इसे आगे बढ़ाएंगे। इस कारण किसी दूर बैठे पोप या खलीफा से मार्गदर्शन नहीं लेना है। हमारे बूद्ध और अंबेडकर हमारे बीच मे बैठे हैं।

  4. ये कि बूद्ध को मानने वाले कई देश हैं। आधे से ज्यादा एशिया सदियों से बुद्धमय हुआ बैठा है पश्चिमी देशों के बौद्धिक वर्ग में भी बुध्द का व्यापक प्रभाव है। वो समीकरण भी भारत को मदद करते हैं और आगे भी करेंगे।

ऐसे और सैकड़ो बिंदु हैं जो रिसर्च से निकलकर आये हैं।

अब भारत के ओबीसी, दलीतों, आदिवासियों को इकट्ठे होकर एक देशव्यापी आंदोलन छेड़ देना है। बूद्ध के धर्म मे जाति, वर्ण और भेदभाव की कोई जगह नहीं है। जो बुराइयां पुराने अभ्यास की तरह गन्दी आदतों की तरह चली आती है उनका भी इलाज किया जा रहा है।

भारत के प्रबुद्ध और सभ्य होने का एकमात्र मार्ग बौद्ध धर्म से होकर गुजरता है। इस बात को पूरे भारत मे फैलाइए, ये बहुत बड़ा मिशन है और सभी बहुजनों पर एक बड़ी जिम्मेदारी है।

अन्धविश्वास छोड़ें, बौद्ध आचार व्यवहार को खुद अपनाएं और दूसरों को प्रेरित करें।

शुरुआत अंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाओं से करें।

जय भीम नमो बुद्धाय

पंकज मेश्राम

(फोटोग्राफर तथा पत्रकार – सकाळ दैनिक वृत्तपत्र )

मो. – 8805920106

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