भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यक दहशत का शिकार

स्वराज इंडिया माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ट्रिपल तलाक़ की प्रथा को असंवैधानिक घोषित करने के आदेश का स्वागत करती है। यह ग़ौरतलब है कि हालाँकि यह फ़ैसला बहुमत पर आधारित है, लेकिन अल्पमत वाले दो जजों ने भी ट्रिपल तलाक़ को ग़लत माना और सरकार से इसके ख़िलाफ़ क़ानून बनाने को कहा। यह आदेश मुस्लिम महिलाओं और देश की महिला आंदोलनों की बड़ी जीत है।

भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन जैसे संगठन इसके लिए बधाई के पात्र है जिनके सतत प्रयास और सघर्षो के कारण ही आज यह फ़ैसला आया है। स्वराज इंडिया सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की सराहना करता है और यह उम्मीद करता है कि सभी धर्मों में समान रूप से महिला विरोधी कृत्यों/ प्रथाओं पर अब प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

मुस्लिम महिलाओं को अन्यायपूर्ण तलाक़ से मुक्ति मिलने के बाद तलाक़ के बिना पति द्वारा छोड़ दी गयीं लाखों ‘परित्यकता’ हिन्दू महिलाओं को भी अब न्याय मिलना चाहिए। स्वराज इंडिया का मानना है कि ट्रिपल तलाक़ अमानवीय, असंवैधानिक होने के साथ गैर इस्लामिक भी है। हम आशा करते हैं कि यह क़ानूनी विवाद समाप्त होने के बाद देश का ध्यान मुस्लिम समुदाय की सबसे बड़ी समस्याओं की तरफ़ जाएगा।

आज देश भर में मुस्लिम अल्पसंख्यक दहशत का शिकार है। मुस्लिम सामाजिक और धार्मिक नेताओं व अपने आप को “धर्मनिरपेक्ष” कहने वाली पार्टियों को अब ट्रिपल तलाक़ जैसे मुद्दों को छोड़ कर मुस्लिम समाज के असल गंभीर मुद्दों जैसे शैक्षणिक असमानता, रोजगार और आवास में मुसलमानो के साथ भेदभाव और आतंकवाद के नाम पर झूठे मुक़दमे में फंसाया जाना इत्यादि पर ध्यान देना चाहिए।

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