असम की इस फोटो और इसे खींचने वाले टीचर से जुड़ी एक दर्दनाक कहानी सामने आई है

असम की एक तस्वीर वायरल हुई. असम के धुबरी जिले के नस्कारा लोवर प्राइमरी स्कूल की तस्वीर. दो बच्चे छाती तक बाढ़ के पानी में डूबे हुए तिरंगे को सलामी दे रहे थे. उनके साथ दो वयस्क खड़े थे. उस तस्वीर में खड़े एक-एक शख्स को हीरो का दर्जा मिला. फ़ोटो ऐसी फ़ैली कि जंगल की आग शरमा गई. उस स्कूल के टीचर मिज़ानुर रहमान ने ये तस्वीर फेसबुक पर डाली थी. उनकी प्रोफाइल से एक लाख से ज़्यादा बार ये तस्वीर शेयर की गई.
इस तस्वीर के पीछे की एक भयानक कहानी सामने आई है. टेलीग्राफ़ के अनुसार इस तस्वीर के खींचे जाने के 2 घंटे के भीतर ही फ़ोटो पोस्ट करने वाले टीचर मिज़ानुर रहमान के रिश्ते में भाई रशीदुल इस्लाम को बाढ़ अपने साथ बहा ले गई. वो बाढ़ के पानी में डूब कर मर गए. अभी तक फिलहाल ये तो नहीं मालूम चल पाया है कि जब ये तस्वीर खींची गयी थी, रशीदुल इस्लाम उस वक़्त स्कूल में मौजूद थे या नहीं.
15 अगस्त की सुबह उस स्कूल में झंडे के नीचे 4 टीचर्स और 2 बच्चे खड़े थे. इनमें से 2 टीचर्स उस वायरल होने वाली तस्वीर में नहीं दिखते हैं. बाकी के स्कूल आए हुए 14-15 बच्चे दूर से खड़े होकर ये सब कुछ होता देख रहे थे. मिज़ानुर और स्कूल के हेडमास्टर ताज़म सिकंदर ने बताया कि झंडे के नीचे दो बच्चों को इसी वजह से रखा गया था क्यूंकि उन्हें तैरना आता था. बच्चों और टीचर्स ने उस पानी में खड़े होकर राष्ट्रगान भी गाया.
इसके अलावा एक और बात. ये तस्वीर क्यूं खींची गयी, इसकी भी कहानी है. इस तस्वीर को आमिर हामज़ा यानी क्लस्टर रीसोर्स सेंटर को-ऑर्डीनेटर को भेजा जाना था. वहां से ये तस्वीर ब्लॉक ऑफिसर के पास जानी थी जहां से इसे गुवाहाटी के एजुकेशन डिपार्टमेंट तक पहुंचना था.
एचआरडी मिनिस्ट्री ने 7 अगस्त को एक सर्कुलर देश के सभी राज्यों तक पहुंचाया था. सर्कुलर के अनुसार हर स्कूल को अनिवार्य रूप से एक कार्यक्रम आयोजित करवाने की बात कही गई थी जिसमें हर स्टूडेंट और टीचर को गरीबी, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, साम्प्रदायिकता और जातिवाद से 2022 तक आज़ादी पाने की प्रतिज्ञा लेनी थी. माना जा रहा है कि ये सर्कुलर ही वो वजह है जिसके अनिवार्य करवा दिए जाने वाले इस कार्यक्रम की वजह से ही स्टूडेंट्स और टीचर्स को वहां इकट्ठा किया गया था.
यानी कुल मिलाकर बात ये है कि बच्चों को ज़बरदस्ती अमानवीय हालात में स्कूल बुलाया गया, जहां उन्हें कमर तक या छाती तक के पानी में खड़े होकर झंडे को सलामी ठोंकनी पड़ी, बह जाने के खतरे से जूझना पड़ा, गंदे पानी में खड़े होकर बीमारी के खतरे से लगातार जूझते रहना पड़ा. आयरनी ये है कि उन्हें देश की तमाम समस्याओं से निपटने की कसम उठानी थी. साल 2022 तक. 2022 का उल्लेख प्रधानमंत्री मोदी ने अपने 15 अगस्त के भाषण में भी किया. उन्होंने बताया कि 2022 तक उनकी सरकार देश की तमाम समस्याओं से निजात दिलवाएगी. यानी बच्चों को बाढ़ के पानी में खड़ा करवाकर सरकार अपना एजेंडा टाइट कर रही थी.

Source- केतन बुकरैत TheLallonTop

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