सफलता का घोषणा पत्र – डॉ0 बी.पी. अशोक, IPS की कलम से


 साथियों मेरी सफलता के पीछे किसी देवी देवता या चमत्कार का हाथ नहीं है। मैं कभी किसी पूजा पाठ के भ्रम में नहीं पड़ा, मैंने किसी ज्योतिषी से दिन नहीं दिखाए, मैंने कोई तीर्थयात्रा नहीं की, मैंने कोई कलावा नहीं बंधवाया, देखो मेरे हाथ में कोई चमत्कारी अंगूठी भी नहीं है। मैंने गले में कोई चीज या चमत्कारी माला नहीं पहनी, मेरे माथे पर कोई तिलक भी नहीं है। मैंने हाथों की रेखाओं या माथे की रेखाओं में भविष्य नहीं तलाशा, मैंने कभी वास्तुकला का ध्यान नहीं रखा, मेरी सफलता के पीछे पूर्व जन्मों का कोई फल नहीं है मैंने किसी की आरती नहीं उतारी, मैंने माथे पर कोई काला टीका नहीं लगाया किसी नदी में नहाने से भी मुझे सफलता नहीं मिली मेरे घर के सामने कोई ढोलक नहीं टंगी है। मैंने किसी धर्म के ठेकेदार को रिश्वत नहीं दी मैंने किसी नौकरी लगवाने वाले को पैसा नहीं दिया मैंने कोई मंत्र नहीं पढ़वाया, मैंने कोई हवन नहीं किया, मैंने कोई मुहूर्त नहीं निकलवाया, मैंने किसी शक्ति के सामने चढ़ावा नहीं चढ़ाया, किसी बड़े आदमी के पैरों में गिरकर सफलता प्राप्त नहीं की। मैंने किसी ग्रह के बदलने का इंतजार नहीं किया, मैंने किसी उपहार की बोली नहीं लगाई, मैंने अपने शरीर मस्तिष्क और व्यवहार पर नियंत्रण रखा, मैंने जीवन में बचपन से ही कड़ी मेहनत की पढ़ाई की 10-10 घंटे पढ़ने वाला विद्यार्थी रहा, जब फेल हो गया तो और अधिक परिश्रम से पढ़ाई की और ध्यान से पढ़ाई की नई रणनीति तय की, अपना समय प्रबंधन किया, गुरुओं से मार्गदर्शन लिया, माता पिता से प्रेरणा व आशीर्वाद लिया, मित्रों से सहयोग लिया, पड़ोसियों से उधार लिया, रिश्तेदारों से जलन नहीं की। अपने से अधिक सफल लोगों से मार्गदर्शन लिया उन की खासियत देखी उनकी कमियों को महत्व नहीं दिया मैंने महा मानव बुद्ध, ज्योतिबा फूले, बाबा साहब अंबेडकर के जीवन संघर्ष और उद्देश्य को समझा और नैतिकता के रास्ते पर चला, विज्ञान के रास्ते पर चला, मैंने पुरानी परंपराओं उत्सवों पर समय, धन और ऊर्जा नहीं गंवाई। अपने चरित्र को बनाए रखा तथा रोजमर्रा के झगड़ों से स्वयं को बचाया। किसी प्रकार का नशा और अहंकार से अपने आप को बचाया, दूसरों की हंसी उड़ाने की जगह मैंने दूसरों की कमियों को गुरु की तरह माना मैंने बाबा साहब के बनाए संविधान और आरक्षण का लाभ उठाया मैं जो कुछ भी हूं बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर के कारण हूं, इस बात का बदला मैं संविधान की रक्षा कर के चुकाऊंगा। मैं समाज के पुनर्निर्माण के लिए सदैव तत्पर रहूंगा मैं अपने सभी गुरुजनों के प्रति कृतज्ञ हूं मेरे माता पिता भाई बहन सभी ने मेरे जीवन को संवारा है मैं उनका सदैव ध्यान रखूंगा। साथ ही मैं अपने परिचितों, मित्रों, छोटे बच्चों विद्यार्थियों से यह अपील करता हूं कि वह किसी अंधविश्वास के भ्रम में ना पड़कर मेहनत, अच्छाई, त्याग और विज्ञान का रास्ता अपनायें और समाज, राष्ट्र और मानवता को गौरवान्वित करें। जिन्होंने हम पर आंखें लगा रखी है उन्हें कभी निराश ना करें शक्ति के गलियारे में बैठकर हिस्सेदारी का एहसास दिलाएं यही बाबा साहब सपना था यही सामाजिक न्याय की सफल प्रक्रिया है। यह स्पष्ट है कि यदि हम अंधविश्वासों पर चलते रहे तो हमारी ऊर्जा, धन और समय बर्बाद होंगे, हमें दबाकर रखने वाले आबाद होंगे, मजबूत होंगे और कमजोर लोगों पर अत्याचार होंगे। हमारे देश में आपसी प्यार कम होगा, सामाजिक एकता कम होगी, राष्ट्रवाद नहीं बढ़ेगा, वर्ण व्यवस्था पुनर्स्थापित होगी। कमजोर वर्ग के लोगों का कल्याण अंधविश्वास त्याग कर ही हो सकता है नई पीढ़ी दुनिया की मुख्यधारा से जुड़े यही हमारा आंदोलन है, यही सशक्तिकरण है।

जय भीम
 आपका 

डॉक्टर बी पी अशोक
नोट_ सभी अधिकारी, नेता तथा बी एस एस के सभी लोगों से प्रार्थना/अपील है, कि उपरोक्त बातों को देहात क्षेत्र में और नई पीढ़ी को हर कैडर कैंप में अवश्य लाऐ

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